LDA के नाम पर ‘कार्रवाई की दहशत’ या वसूली का खेल?

व्हाट्सएप पर अवैध निर्माण की खबरों का सच सवालों के घेरे में

*लखनऊ*।(*शेख साजिद हुसैन*) शहर में निर्माण कार्यों को लेकर इन दिनों सोशल मीडिया, खासकर व्हाट्सएप ग्रुप्स पर अवैध निर्माण की खबरें तेजी से वायरल हो रही हैं। बीते कुछ समय में करीब एक दर्जन से अधिक निर्माणाधीन इमारतों को लेकर इस तरह की खबरें सामने आई हैं, जिनमें दावा किया गया कि संबंधित बिल्डरों के खिलाफ लखनऊ विकास प्राधिकरण (LDA) सख्त कार्रवाई करने जा रहा है।

हालांकि इन खबरों का विश्लेषण करने पर एक अलग ही तस्वीर सामने आती है। अधिकांश खबरें एक या दो बार चलने के बाद अचानक गायब हो जाती हैं और आगे कोई फॉलोअप या आधिकारिक कार्रवाई की पुष्टि नहीं होती। इससे यह सवाल खड़ा होता है कि क्या वास्तव में इन निर्माणों पर कार्रवाई हुई या फिर मामला कुछ और है।

*सूत्रों की मानें* तो यह पूरा खेल दहशत और मैनेजमेंट के बीच कहीं अटका हुआ है। बताया जा रहा है कि जैसे ही किसी बिल्डिंग के खिलाफ खबर वायरल होती है, संबंधित बिल्डर तक इसकी सूचना पहुंचाई जाती है। इसके बाद खबर को आगे न बढ़ाने के लिए बातचीत और ‘मैनेजमेंट’ का दौर शुरू होता है।

*जानकारों का कहना है* कि इस पूरे प्रकरण में कुछ ऐसे लोग सक्रिय हैं जो विभागीय अधिकारियों से करीबी संबंध होने का दावा करते हैं। ये लोग खुद को LDA से जुड़ा प्रभावशाली बताते हुए बिल्डरों से संपर्क करते हैं और कार्रवाई रुकवाने के नाम पर सौदेबाजी करते हैं। जिसकी जितनी पकड़ उसकी उतनी कीमत यही फार्मूला इस खेल में काम करता नजर आ रहा है।

वहीं दूसरी तरफ, यह भी दावा किया जा रहा है कि सभी निर्माण अवैध नहीं हैं। कई बिल्डिंगें स्वीकृत मानचित्र के अनुसार ही बन रही हैं, लेकिन उन्हें भी इस तरह की खबरों के जरिए निशाना बनाया जा रहा है। इससे न सिर्फ बिल्डरों में भ्रम और डर का माहौल बन रहा है, बल्कि विभाग की छवि पर भी सवाल उठ रहे हैं।

सूत्र यह भी बताते हैं कि कुछ लोग बिल्डरों से सीधे ठेका लेकर यह जिम्मेदारी लेते हैं कि “आप बेफिक्र होकर निर्माण कराइए बाकी सब हम संभाल लेंगे।” ऐसे में यह पूरा मामला केवल अवैध निर्माण तक सीमित नहीं रह जाता, बल्कि LDA के नाम पर संभावित धन उगाही के संगठित खेल की ओर इशारा करता है।

अब बड़ा सवाल यह है कि क्या LDA इन वायरल खबरों और उनके पीछे छिपे नेटवर्क की जांच करेगा? क्या वास्तव में अवैध निर्माण हो रहे हैं या फिर यह सिर्फ दबाव बनाकर वसूली का एक जरिया बन चुका है?

शहर में बढ़ते इस ट्रेंड ने आम लोगों और जिम्मेदार संस्थाओं के बीच भरोसे को भी प्रभावित किया है। जरूरत इस बात की है कि संबंधित विभाग पारदर्शिता के साथ कार्रवाई करे और सच्चाई को सामने लाए, ताकि अफवाहों और वसूली के इस खेल पर विराम लग सके। हम इस मामले की सच्चाई से एक दिन ज़रूर पर्दा उठाएंगे।क्योंकि सच सामने लाने के लिए अभी वक्त लगेगा।अधिकतर मामले जोन-7 के सामने आए है

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