विभागीय जांच में व्यक्तिगत सुनवाई के लिए तलब

*लखनऊ*।(*सय्यद जावेद हुसैन*) विकास प्राधिकरण (LDA) में तैनात अवर अभियंता विपिन बिहारी राय की मुश्किलें बढ़ती नजर आ रही हैं।
अवैध निर्माणों के विरुद्ध प्रभावी कार्रवाई न करने तथा ध्वस्तीकरण आदेशों का अनुपालन सुनिश्चित कराने में कथित लापरवाही के आरोपों के चलते उनके विरुद्ध विभागीय अनुशासनिक कार्रवाई प्रारंभ कर दी गई है।
प्राप्त जानकारी के अनुसार, उत्तर प्रदेश शासन के निर्देश पर चल रही विभागीय जांच के तहत अवर अभियंता विपिन बिहारी राय को व्यक्तिगत सुनवाई के लिए तलब किया गया है।
इस संबंध में लखनऊ मंडलायुक्त कार्यालय द्वारा नोटिस जारी कर उन्हें 16 जून को आयुक्त कक्ष में उपस्थित होने के निर्देश दिए गए हैं।
बताया जा रहा है कि जांच में यह आरोप प्रमुख रूप से सामने आया है कि उनके कार्यक्षेत्र में कई अवैध निर्माणों के विरुद्ध जारी ध्वस्तीकरण आदेशों का प्रभावी अनुपालन नहीं कराया गया।
साथ ही, अवैध निर्माणों को रोकने और नियमानुसार कार्रवाई करने के अपने दायित्वों के निर्वहन में अपेक्षित सक्रियता नहीं दिखाई गई। इन आरोपों को गंभीरता से लेते हुए शासन स्तर पर विभागीय अनुशासनिक कार्रवाई की प्रक्रिया शुरू की गई है।
सूत्रों के अनुसार, लंबे समय से विभिन्न क्षेत्रों में अवैध निर्माणों की बढ़ती संख्या और उनके विरुद्ध कार्रवाई में ढिलाई को लेकर शिकायतें प्राप्त हो रही थीं।
इसी क्रम में संबंधित अधिकारियों और कर्मचारियों की भूमिका की जांच की जा रही है। विभागीय जांच में अवर अभियंता की कार्यप्रणाली, निरीक्षण व्यवस्था तथा प्रवर्तन संबंधी कार्रवाई की समीक्षा भी की जा रही है।
प्रशासनिक हलकों में इस कार्रवाई को अवैध निर्माणों के मामलों में जवाबदेही तय करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। माना जा रहा है कि यदि जांच में आरोप पुष्ट होते हैं तो संबंधित अधिकारी के विरुद्ध और भी कड़ी विभागीय कार्रवाई की जा सकती है।
उल्लेखनीय है कि प्रदेश सरकार एवं LDA प्रशासन लगातार अवैध निर्माणों पर अंकुश लगाने और जिम्मेदार अधिकारियों की जवाबदेही सुनिश्चित करने की बात कहता रहा है।
ऐसे में अवर अभियंता विपिन बिहारी राय के विरुद्ध शुरू हुई विभागीय कार्रवाई को प्रशासन की सख्त कार्यशैली और भ्रष्टाचार तथा लापरवाही के प्रति जीरो टॉलरेंस नीति के रूप में देखा जा रहा है।
अब सभी की निगाहें 16 जून को होने वाली व्यक्तिगत सुनवाई और उसके बाद विभागीय जांच की आगामी कार्रवाई पर टिकी हैं।
