महर्षि सुपंच सुदर्शन वाटिका का मामला गरमाया

एलडीए और नगर निगम आमने-सामने

*लखनऊ*।(*संवाददाता सय्यद जावेद हुसैन*) राजधानी के लालबाग स्थित भोपाल हाउस परिसर में बनी महर्षि सुपंच सुदर्शन वाटिका को पुनर्निर्माण और सौंदर्यीकरण के नाम पर तोड़े जाने का मामला अब तूल पकड़ता जा रहा है।

 

इस कार्रवाई को लेकर स्थानीय जनप्रतिनिधियों और नगर निगम प्रशासन की भूमिका पर सवाल उठने लगे हैं। मामला राजनीतिक और प्रशासनिक स्तर पर चर्चा का विषय बन गया है।

जानकारी के अनुसार, लखनऊ विकास प्राधिकरण (एलडीए) द्वारा महर्षि सुपंच सुदर्शन वाटिका को नए स्वरूप में विकसित करने की योजना के तहत पुराने पार्क के हिस्सों को हटाने और तोड़फोड़ का कार्य शुरू किया गया है।

हालांकि, इस प्रक्रिया को लेकर यह आरोप लगाया जा रहा है कि एलडीए ने न तो नगर निगम प्रशासन से औपचारिक अनुमति ली और न ही क्षेत्रीय पार्षद अथवा स्थानीय जनप्रतिनिधियों को विश्वास में लिया।

यह पार्क हजरतगंज क्षेत्र के राम तीरथ वार्ड में स्थित है। इस वार्ड का प्रतिनिधित्व लगातार पांच बार से भाजपा के पार्षद नागेंद्र सिंह चौहान कर रहे हैं।

पार्षद नागेंद्र सिंह चौहान का कहना है कि महर्षि सुपंच सुदर्शन वाटिका नगर निगम की संपत्ति है और इसमें किसी भी प्रकार का निर्माण, पुनर्निर्माण अथवा संरचनात्मक परिवर्तन करने से पहले नगर निगम से अनापत्ति प्रमाण पत्र (एनओसी) लेना आवश्यक था।

पार्षद ने आरोप लगाया कि एलडीए ने निर्धारित प्रक्रिया का पालन किए बिना कार्य प्रारंभ कर दिया, जिससे स्थानीय लोगों और जनप्रतिनिधियों में असंतोष व्याप्त है। उनका कहना है कि यदि पार्क का विकास ही करना था तो पहले संबंधित विभागों और स्थानीय प्रतिनिधियों से चर्चा की जानी चाहिए थी।

नागेंद्र सिंह चौहान ने यह भी कहा कि शहर में ऐसे अनेक पार्क हैं जो वर्षों से रखरखाव और बजट के अभाव में जर्जर अवस्था में पड़े हुए हैं।

ऐसे में पहले उन पार्कों के संरक्षण और विकास पर ध्यान दिया जाना चाहिए था। उन्होंने सवाल उठाया कि एक व्यवस्थित और सुरक्षित पार्क को तोड़कर पुनः विकसित करने की आवश्यकता क्यों महसूस की गई।

पार्षद के अनुसार उन्होंने इस पूरे प्रकरण की शिकायत महापौर सुषमा खर्कवाल, नगर आयुक्त गौरव कुमार तथा नगर निगम के मुख्य अभियंता महेश वर्मा से कर दी है।

साथ ही उन्होंने संकेत दिया है, कि यदि मामले में संतोषजनक कार्रवाई नहीं हुई तो इसे नगर निगम सदन में प्रमुखता से उठाया जाएगा।

उधर, स्थानीय नागरिकों के बीच भी इस विषय को लेकर मिश्रित प्रतिक्रियाएं देखने को मिल रही हैं।

कुछ लोग पार्क के आधुनिकीकरण और सौंदर्यीकरण के पक्ष में हैं, जबकि कई नागरिकों का मानना है कि सार्वजनिक संपत्तियों से जुड़े निर्णयों में स्थानीय निकाय और जनप्रतिनिधियों की सहभागिता सुनिश्चित की जानी चाहिए।

अब निगाहें नगर निगम प्रशासन और एलडीए की आगामी प्रतिक्रिया पर टिकी हैं।

यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि पार्क के स्वामित्व, अनुमति प्रक्रिया और विकास कार्यों को लेकर उठे सवालों का समाधान किस प्रकार किया जाता है तथा क्या यह मामला नगर निगम सदन में व्यापक बहस का विषय बनता है।

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