रात में चेकिंग और आपूर्ति व्यवस्था पर नाराजगी
लोगों ने उठाए कई मुद्दे विभाग द्वारा उठाया गया अच्छा कदम
लेकिन कुछ और है उन पर भी ध्यान दीजिए


लखनऊ। बिजली चोरी पर अंकुश लगाने के लिए 11000 लाइन के एसडीओ गुलरेज रिज़वी द्वारा उपभोक्ता जन-जागरूकता अभियान चलाया जा रहा है। इस अभियान के तहत मारवाड़ी, ओल्ड व न्यू अपट्रान सब-स्टेशन से जुड़े क्षेत्रों में विभागीय टीम ने सक्रियता दिखाते हुए व्यापक स्तर पर चेकिंग अभियान चलाया।
एसडीओ के नेतृत्व में मॉर्निंग रेड, जेई मॉर्निंग रेड, जेई 11000 और अन्य स्टाफ की टीम ने न्यू नूरबाड़ी, रुस्तम नगर, फाजिल नगर, वज़ीर बाग, पुराना चबूतरा समेत कई इलाकों में जाकर बिजली चोरी की संभावनाओं, ओवरलोडिंग और संदिग्ध कनेक्शनों की जांच की। रात्रि के समय संभावित चोरी के प्वाइंट्स को ध्यान में रखते हुए विशेष सतर्कता बरती गई।
हालांकि, सूत्रों के अनुसार बालागंज क्षेत्र में इस अभियान का दूसरा पहलू भी सामने आया, जहां रात के समय विभागीय कर्मचारी घरों और बिजली के खंभों पर सीढ़ी लगाकर चेकिंग करते नजर आए। स्थानीय लोगों का कहना है कि सूर्यास्त के बाद इस प्रकार की कार्रवाई नियमों के विरुद्ध मानी जाती है, जिससे विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठने लगे हैं।
बिजली विभाग द्वारा चलाया जा रहा यह जन-जागरूकता और चोरी रोकने का अभियान निश्चित रूप से सराहनीय कदम है, लेकिन इसकी प्रभावशीलता पर अभी भी प्रश्नचिह्न बना हुआ है। कई इलाकों में उपभोक्ताओं का आरोप है कि रात 9 बजे से सुबह 4 बजे तक बिजली आपूर्ति बेहद कमजोर रहती है। लोगों ने इसकी तुलना एक बीमार शरीर से की है, जो पूरी रात संघर्ष करता है और सुबह होते ही अचानक स्वस्थ हो जाता है—उसी तरह सुबह 4 बजे के बाद बिजली सप्लाई सामान्य हो जाती है।
सूत्रों का यह भी दावा है कि पुराने लखनऊ के अधिकांश क्षेत्रों में यही स्थिति बनी हुई है। विडंबना यह है कि जिन क्षेत्रों में खुद एसडीओ स्तर से बिजली चोरी रोकने की मुहिम चलाई जा रही है, वहीं आपूर्ति व्यवस्था और अभियान की पारदर्शिता पर सवाल उठ रहे हैं।


सबसे चिंताजनक पहलू यह सामने आया है कि मॉर्निंग रेड की गोपनीयता भी प्रभावित हो रही है। बताया जा रहा है कि विभागीय टीम के निकलने से पहले ही बिजली चोरी करने वालों को कार्रवाई की जानकारी मिल जाती है, जिससे अभियान की सफलता पर असर पड़ रहा है।
ऐसे में जरूरत है कि विभाग न केवल सख्ती से बिजली चोरी पर लगाम लगाए, बल्कि अपनी कार्यप्रणाली में पारदर्शिता और जवाबदेही भी सुनिश्चित करे, ताकि उपभोक्ताओं का विश्वास कायम रह सके और अभियान वास्तव में सफल हो सके।
