कम खपत, फिर भी भारी बिल का आरोप
संविदा कर्मचारियों की भी बढ़ी परेशानी

लखनऊ: प्रदेश में स्मार्ट मीटर को लेकर जहां एक ओर सरकार और ऊर्जा मंत्री ए के शर्मा उपभोक्ताओं को राहत देने के दावे कर रहे हैं, वहीं दूसरी ओर ज़मीनी हकीकत कुछ अलग तस्वीर पेश कर रही है। आम उपभोक्ता अब स्मार्ट मीटर की गुणवत्ता, बिलिंग सिस्टम और वसूली के तरीकों पर सवाल खड़े कर रहे हैं।
कम खपत, फिर भी भारी बिल का आरोप
कई उपभोक्ताओं ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि उनके घरों में सिर्फ पंखा और बल्ब जैसे सीमित उपकरण ही चलते हैं, इसके बावजूद महीने पूरा होने से पहले ही ₹3600 तक का बिल आ चुका है। उनका कहना है कि महीने के अंत तक यह बिल ₹4000 के पार जा सकता है।
कम आय वर्ग के लोगों के लिए यह स्थिति बेहद चिंताजनक है। एक संविदा कर्मचारी ने बताया कि उसकी मासिक सैलरी ₹10,000 से भी कम है, ऐसे में अगर ₹4000 बिजली बिल में ही चला जाए तो परिवार का खर्च चलाना मुश्किल हो जाता है।
संविदा कर्मचारियों की भी बढ़ी परेशानी
बिजली विभाग के संविदा कर्मचारी, जो खुद कम वेतन पर काम कर रहे हैं, वे भी स्मार्ट मीटर की व्यवस्था से परेशान नजर आ रहे हैं। उनका कहना है कि एक ओर उनसे वसूली और निगरानी का दबाव है, वहीं दूसरी ओर वे खुद बढ़ते बिलों से जूझ रहे हैं।
छोटी राशि के लिए भी फोन कॉल
स्मार्ट मीटर लागू होने के बाद विभाग की वसूली प्रक्रिया भी बदल गई है। अब ₹80 से ₹400 जैसी छोटी बकाया राशि के लिए भी उपभोक्ताओं को फोन कर भुगतान करने के लिए कहा जा रहा है।
उपभोक्ताओं का कहना है कि पहले इतनी छोटी रकम के लिए इस तरह की सक्रियता नहीं दिखाई जाती थी। ऐसे में लोग सवाल उठा रहे हैं कि यह नई व्यवस्था सुविधा है या असुविधा।
वसूली के लिए सख्ती, उपभोक्ता हैरान
एक चौंकाने वाला मामला लखनऊ के ऐश बाग इलाके से सामने आया है, जहां महज ₹1030 की बकाया राशि वसूलने के लिए विजिलेंस टीम, विभागीय अधिकारी और कई कर्मचारी उपभोक्ता के घर पहुंच गए।
इस कार्रवाई ने विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर दिए हैं कि क्या इतनी छोटी रकम के लिए इस स्तर की कार्रवाई जरूरी है।
तकनीकी खामियों पर भी उठ रहे सवाल
उपभोक्ताओं का यह भी आरोप है कि—
रिचार्ज के बाद कनेक्शन बहाल होने में कई घंटे लग जाते हैं
मीटर की रीडिंग और बिलिंग में पारदर्शिता की कमी है
वास्तविक खपत के मुकाबले बिल अधिक आ रहा है
राहत बनाम हकीकत
सरकार जहां स्मार्ट मीटर के जरिए पारदर्शिता और उपभोक्ता सुविधा बढ़ाने की बात कर रही है, वहीं मौजूदा हालात में कई उपभोक्ता इसे परेशानी का कारण मान रहे हैं।
निष्कर्ष
स्मार्ट मीटर व्यवस्था का उद्देश्य भले ही आधुनिक और पारदर्शी बिजली प्रबंधन हो, लेकिन मौजूदा समय में इसके क्रियान्वयन को लेकर कई सवाल खड़े हो रहे हैं। उपभोक्ताओं का कहना है कि जब तक बिलिंग की सटीकता, तकनीकी समस्याओं का समाधान और वसूली के तरीकों में संतुलन नहीं आता, तब तक यह व्यवस्था राहत से ज्यादा बोझ साबित हो सकती है।
