इंसानी बस्तियों में सांप निकलने की घटनाएं 60 फीसदी बढ़ीं,

इंसानी बस्तियों में सांप निकलने की घटनाएं 60 फीसदी बढ़ीं,

गर्मी और उमस के चलते सांप अपने बिलों से निकलकर इंसानी आबादी के पास भटक रहे हैं। वर्ष 2015 से तुलना करें तो आवासीय भवनों व कार्यालय परिसरों के पास सांप पाए जाने की घटना में 60 फीसदी तक का इजाफा हुआ है।

राजधानी में वर्ष 2015 में जहां जून-जुलाई में सांप निकलने की 59 घटनाएं सामने आई थीं। वहीं, इस वर्ष इन दो महीने में सांप निकलने की 99 घटनाएं सामने आई हैं। गौरतलब है कि अरावली और यमुना को दिल्ली के पर्यावरण के दो प्रमुख नियामकों में शामिल किया जाता है। इन दोनों पर्यावासों में घुले-मिले जंतु और वनस्पतियां पाई जाती हैं। इनमें अलग-अलग प्रजाति के सांप भी शामिल हैं।

चिंता की बात यह है कि जून और जुलाई में आमतौर पर होने वाली गर्मी और उमस के चलते इनके अपने बिलों से निकलकर इंसानी आबादी के आसपास भटकने की घटनाओं में बढ़ोतरी हो रही है। राजधानी में सांप पकड़ने वाली संस्था के प्रमुख कार्तिक सत्यनारायणन ने बताया कि सांपों के इंसानी आबादी में आने की घटनाओं में बढ़ोतरी हुई है। हालांकि, इसका मतलब यह नहीं निकाला जा सकता कि सांपों की आबादी बढ़ गई है। बल्कि यह कहा जा सकता है कि सिर्फ इंसानों के साथ इनकी मुठभेड़ की घटनाएं बढ़ गई हैं।

सांप मिलने की ज्यादातर घटनाएं द्वारका, छतरपुर, सैनिक फार्म, जेएनयू परिसर, ग्रेटर कैलाश एक, दो व तीन और वसंत विहार जैसे क्षेत्रों में सामने आई हैं। इस साल पकड़े गए 99 सांपों में से 74 सांप घरों व आवासीय भवनों से पकड़े गए हैं। जबकि, आठ सांप स्कूल या शैक्षिक संस्थान से पकड़े गए।

इंसानी आबादी के बीच इस साल मुख्य तौर पर स्पेक्टेबल कोबरा (नाग), करैत, पाइथन (अजगर), इंडियन रैट स्नेक, कॉमन सैंड बोआ, वोल्फ स्नेक, ब्लैक हेडेड रॉयल स्नेक प्रजाति के सांप पकड़े गए हैं। इनमें से कोबरा और करैत बेहद जहरीले सांप होते हैं और इनके काटने से इंसान की मौत भी हो सकती है।

सघन वनों की कमी और निर्माण गतिविधियों के चलते सांप अपने सुरक्षित ठिकानों से बाहर आ रहे हैं। निर्माण कार्य के दौरान गहराई से होने वाली खुदाई के चलते सांपों के आवास नष्ट हो जाते हैं और वे छिपने के लिए इंसानों की आबादी की तरफ जाते हैं।

– सूर्य प्रकाश, वैज्ञानिक, स्कूल ऑफ लाइफ साइसेंज, जेएनयू.

‘ गर्मी और उमस के चलते बाहर निकल रहे सांप ‘ वर्ष 2015 की तुलना में मामलों में इजाफा हुआ ‘ इस वर्ष जून-जुलाई महीने में अब तक 99 मामले सामने आ चुके हैं।

वर्ष 2021.

जून    32.

जुलाई    67.

जून    32.

जुलाई    39.

वर्ष 2016.

जून    24.

जुलाई    35.

वर्ष 2015.

जून    46.

जुलाई    69.

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