स्मार्ट मीटरों की गुणवत्ता जांच के लिए समिति गठित

बदलाव कार्य पर लगाई गई रोक

उपभोक्ताओं की शिकायतों के बाद लिया गया फैसला

*लखनऊ*:उत्तर प्रदेश पावर कॉरपोरेशन लिमिटेड ने प्रदेश में लगाए जा रहे स्मार्ट मीटरों को लेकर बड़ा कदम उठाया है। निगम ने जहां एक ओर मीटरों की गुणवत्ता और तकनीकी जांच के लिए उच्च स्तरीय समिति का गठन किया है, वहीं दूसरी ओर स्मार्ट मीटर बदलने के कार्य पर तत्काल प्रभाव से रोक लगा दी गई है।

निगम के अध्यक्ष डॉ. आशीष कुमार गोयल ने शनिवार रात यह निर्देश जारी किए। यह फैसला स्मार्ट मीटरों को लेकर मिल रही लगातार शिकायतों और चल रहे विवाद के बीच लिया गया है।

बताया गया है कि यह कार्रवाई केंद्र सरकार की RDSS योजना और केंद्रीय विद्युत प्राधिकरण के दिशा-निर्देशों के तहत की जा रही है। उत्तर प्रदेश में अब तक करीब 85 लाख स्मार्ट मीटर लगाए जा चुके हैं। हालांकि अधिकांश मीटर सही तरीके से काम कर रहे हैं, लेकिन कई जगहों से बिलिंग गड़बड़ी, मीटर की गुणवत्ता और कनेक्टिविटी संबंधी शिकायतें सामने आई हैं।

इन्हीं समस्याओं को ध्यान में रखते हुए निगम ने एक उच्च स्तरीय तकनीकी समिति गठित की है, जिसमें विशेषज्ञों और ऊर्जा विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों को शामिल किया गया है। समिति में अतुल शर्मा और अवध वाजपेयी जैसे तकनीकी विशेषज्ञ भी शामिल हैं।

समिति को निर्देश दिए गए हैं कि वह प्रदेश में लगे सभी प्रकार के स्मार्ट मीटरों की जांच कर उनकी गुणवत्ता और तकनीकी स्थिति का आकलन करे तथा 10 दिनों के भीतर अपनी रिपोर्ट निगम अध्यक्ष को सौंपे।

निगम के इस फैसले से साफ है कि अब बिना जांच के स्मार्ट मीटर बदलने की प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ेगी। रिपोर्ट के आधार पर ही आगे की कार्रवाई तय की जाएगी। इससे उपभोक्ताओं की समस्याओं के समाधान और बिजली व्यवस्था में पारदर्शिता आने की उम्मीद जताई जा रही है।

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