आम लोगों की जमा-पूंजी पर मंडरा रहा खतरा

*लखनऊ*।(*सय्यद जावेद हुसैन*) राजधानी के दुबग्गा क्षेत्र में अवैध प्लाटिंग और बिना स्वीकृत मानचित्र के रो-हाउस निर्माण का मामला चर्चा का विषय बना हुआ है। ज़ोन-7 के अंतर्गत आने वाले भरमरौली, मुर्दापुर, शाहपुर, फरीदीपुर और दशहरी गांव के आसपास बड़े पैमाने पर प्लॉटिंग एवं आवासीय परियोजनाएं संचालित होने की चर्चाएं हैं, जहां लोगों को आसान किश्तों पर प्लॉट और मकान उपलब्ध कराने के दावे किए जा रहे हैं।
स्थानीय सूत्रों के अनुसार इन क्षेत्रों में कई स्थानों पर बिना मानचित्र स्वीकृति के रो-हाउस और आवासीय कॉलोनियां विकसित की जा रही हैं। यही नहीं, ग्रीन वे पब्लिक स्कूल के नाम से भी निर्माण कार्य किए जाने की बात सामने आ रही है, जिसके संबंध में स्थानीय लोगों का दावा है कि आवश्यक स्वीकृतियों को लेकर स्थिति स्पष्ट नहीं है।
बताया जा रहा है कि क्षेत्र में संचालित कई परियोजनाओं का संचालन कथित रूप से “एम. ए. प्रॉपर्टी डीलर” नामक समूह द्वारा फरीदीपुर स्थित हेल्थ क्लब के निकट कार्यालय से किया जा रहा है। हालांकि इन आरोपों की आधिकारिक पुष्टि अभी नहीं हो सकी है, लेकिन क्षेत्र में इसको लेकर चर्चाओं का बाजार गर्म है।
गौरतलब है कि लखनऊ विकास प्राधिकरण के उपाध्यक्ष द्वारा अवैध प्लाटिंग और बिना स्वीकृत मानचित्र के निर्माण कार्यों पर सख्त कार्रवाई के निर्देश पहले ही जारी किए जा चुके हैं। इसके बावजूद यदि क्षेत्र में बड़े पैमाने पर निर्माण गतिविधियां संचालित हो रही हैं तो यह प्रशासनिक व्यवस्था पर कई सवाल खड़े करता है।
स्थानीय लोगों का आरोप है कि क्षेत्रीय अधिकारियों को इन गतिविधियों की जानकारी होने के बावजूद अपेक्षित कार्रवाई नहीं की जा रही है। चर्चाओं में क्षेत्रीय अवर अभियंता और अन्य फील्ड कर्मियों की भूमिका पर भी सवाल उठाए जा रहे हैं। हालांकि इन आरोपों पर संबंधित अधिकारियों का पक्ष सामने आना अभी बाकी है।
इस पूरे मामले का सबसे चिंताजनक पहलू यह है कि निम्न एवं मध्यम वर्गीय परिवार अपनी जीवनभर की कमाई लगाकर इन योजनाओं में प्लॉट और मकान खरीद रहे हैं। अधिकांश खरीदारों को यह जानकारी नहीं होती कि जिस परियोजना में वे निवेश कर रहे हैं, उसका मानचित्र स्वीकृत है या नहीं।
अक्सर लोगों को यह कहकर आश्वस्त किया जाता है कि “मानचित्र पास होने की प्रक्रिया चल रही है” या “जल्द ही सभी स्वीकृतियां मिल जाएंगी”। ऐसे में खरीदार बिना पूरी जांच-पड़ताल किए अपनी मेहनत की कमाई निवेश कर देते हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि भविष्य में प्राधिकरण द्वारा इन निर्माणों को अवैध मानते हुए ध्वस्तीकरण अथवा अन्य कार्रवाई की जाती है, तो सबसे बड़ा नुकसान उन परिवारों को होगा जिन्होंने अपने सपनों का घर खरीदने के लिए वर्षों की बचत लगा दी है।
स्थानीय नागरिकों ने मांग की है कि लखनऊ विकास प्राधिकरण पूरे मामले की निष्पक्ष एवं पारदर्शी जांच कर वास्तविक स्थिति सार्वजनिक करे। साथ ही जिन परियोजनाओं के मानचित्र स्वीकृत नहीं हैं, उनकी सूची सार्वजनिक की जाए ताकि आम जनता किसी भी प्रकार के आर्थिक और मानसिक शोषण का शिकार न हो।
जब तक संबंधित परियोजनाओं की वैधता स्पष्ट नहीं हो जाती, तब तक नागरिकों को किसी भी प्लॉट या रो-हाउस की खरीद से पहले लखनऊ विकास प्राधिकरण से आवश्यक स्वीकृतियों की जांच अवश्य कर लेनी चाहिए।
