मौलाना यासूब अब्बास के आवास अवध प्वाइंट, नक्खास में

मोहर्रम की तैयारियों को लेकर प्रशासन और अंजुमनों की अहम बैठक

सुरक्षा व सुविधाओं पर हुआ मंथन

 

*लखनऊ*। 15 जून(*संवाददाता बुलन्द आवाज़*) मोहर्रम के दौरान बेहतर इंतिज़ामात, सुरक्षा व्यवस्था और अज़ादारों को आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध कराने के उद्देश्य से सोमवार को शहर की विभिन्न अंजुमन-ए-मातमी और क़ौमी तंज़ीमों के जिम्मेदारों तथा जिला प्रशासन के वरिष्ठ अधिकारियों के बीच एक महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई। यह बैठक फ़ख्र-ए-मिल्लत मौलाना यासूब अब्बास के आवास अवध प्वाइंट, नक्खास में संपन्न हुई, जिसमें मोहर्रम के दौरान निकलने वाले जुलूसों, मजालिस और शब्बेदारियों की व्यवस्थाओं पर विस्तार से चर्चा की गई।

बैठक में अंजुमनों और विभिन्न संगठनों के प्रतिनिधियों ने मोहर्रम के दिनों में अज़ादारों को होने वाली संभावित समस्याओं को प्रशासन के समक्ष रखा। प्रतिनिधियों ने साफ-सफाई, पेयजल, बिजली आपूर्ति, ट्रैफिक प्रबंधन, सुरक्षा व्यवस्था और अन्य आवश्यक सुविधाओं को दुरुस्त रखने की मांग की ताकि मोहर्रम के कार्यक्रमों का आयोजन सुचारु रूप से हो सके।

 

इस अवसर पर मौलाना यासूब अब्बास ने कहा कि मोहर्रम के दौरान हजारों की संख्या में अज़ादार दिन-रात हज़रत इमाम हुसैन (अ.स.) की याद में आयोजित कार्यक्रमों में शामिल होते हैं। ऐसे में प्रशासन यह सुनिश्चित करे कि किसी भी श्रद्धालु को अनावश्यक परेशानी का सामना न करना पड़े और सभी धार्मिक कार्यक्रम पूरी श्रद्धा एवं शांति के साथ संपन्न हों। उन्होंने प्रशासन से अज़ादारों को हर संभव सहयोग उपलब्ध कराने की मांग भी की।

जिला प्रशासन के अधिकारियों ने बैठक में उठाए गए सभी मुद्दों को गंभीरता से सुना और भरोसा दिलाया कि मोहर्रम के दौरान आवश्यक व्यवस्थाओं को समय रहते पूरा किया जाएगा। अधिकारियों ने कहा कि सुरक्षा, ट्रैफिक और बुनियादी सुविधाओं को लेकर संबंधित विभागों को आवश्यक निर्देश दिए जाएंगे ताकि किसी प्रकार की असुविधा न हो।

बैठक के दौरान अंजुमनों, क़ौमी तंज़ीमों और प्रशासन के बीच बेहतर समन्वय बनाए रखने पर भी जोर दिया गया। सभी पक्षों ने इस बात पर सहमति जताई कि आपसी तालमेल और सहयोग से मोहर्रम के सभी कार्यक्रम शांतिपूर्ण, व्यवस्थित और पारंपरिक अकीदत के साथ संपन्न कराए जाएंगे।

बैठक के अंत में वक्ताओं ने कहा कि लखनऊ की गंगा-जमुनी तहज़ीब और अज़ादारी की ऐतिहासिक परंपराएं देशभर में मिसाल मानी जाती हैं। इन्हें कायम रखने के लिए प्रशासन और समाज के सभी वर्गों का सहयोग आवश्यक है, जिससे मोहर्रम के आयोजन सौहार्द, शांति और भाईचारे के वातावरण में सम्पन्न हो सकें।

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