*महापौर सुषमा खर्कवाल ने रखे विचार*
*विकसित भारत के लक्ष्य में शहरों की भूमिका पर दिया जोर*
*लखनऊ के नवाचारों को किया साझा*

*लखनऊ/गोवा*। गोवा के पणजी स्थित नोवोटेल होटल में आयोजित “Developed Goa@2037” सम्मेलन के उद्घाटन सत्र में लखनऊ की माननीय महापौर श्रीमती सुषमा खर्कवाल सम्मिलित हुईं। यह सम्मेलन ऑल इंडिया इंस्टीट्यूट ऑफ लोकल सेल्फ गवर्नमेंट (AIILSG) द्वारा अपने 100वें स्थापना वर्ष के उपलक्ष्य में आयोजित किया गया।
उद्घाटन सत्र में गोवा के ऊर्जा, नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा मंत्री आदरणीय श्री आर.एम. धवलीकर, डायरेक्टर जनरल AIILSG श्री जय राज पाठक, माननीय महापौर लखनऊ श्रीमती सुषमा खर्कवाल, माननीय महापौर बरेली डॉ. उमेश गौतम, माननीय महापौर पणजी श्री रोहित, डीडीजी AIILSG श्री रवि रंजन तथा निदेशक गोवा नगर निगम श्री बृजेश मानेरकर सहित विभिन्न शहरों से आए गणमान्य अतिथि उपस्थित रहे।

अपने संबोधन में महापौर श्रीमती सुषमा खर्कवाल ने कहा कि वर्ष 2047 तक विकसित भारत का लक्ष्य तभी साकार होगा जब देश के शहर मजबूत और आत्मनिर्भर बनेंगे। उन्होंने बताया कि आने वाले समय में भारत की अर्थव्यवस्था के 30 ट्रिलियन डॉलर तक पहुंचने के अनुमान में शहरों की भूमिका सबसे महत्वपूर्ण होगी, क्योंकि शहर ही आर्थिक गतिविधियों, रोजगार, नवाचार और निवेश के केंद्र बनते जा रहे हैं।
उन्होंने जोर देते हुए कहा कि तेजी से बढ़ती शहरी आबादी को देखते हुए शहरों को स्मार्ट, सतत और समावेशी बनाना आवश्यक है। इसके लिए बेहतर बुनियादी ढांचा, सार्वजनिक परिवहन, स्वच्छता, जल प्रबंधन और डिजिटल सेवाओं को मजबूत करना होगा, साथ ही पर्यावरण के अनुकूल विकास को प्राथमिकता देनी होगी।

लखनऊ के अनुभव साझा करते हुए महापौर ने बताया कि राजधानी को वर्ष 2047 की आवश्यकताओं के अनुरूप विकसित किया जा रहा है। “लखनऊ-एससीआर” की अवधारणा पर कार्य हो रहा है, साथ ही ग्रीन कॉरिडोर, आउटर रिंग रोड कनेक्टिविटी और आधुनिक शहरी योजना के माध्यम से ट्रैफिक और प्रदूषण कम करने के प्रयास किए जा रहे हैं। उन्होंने बताया कि शहर में 2000 से अधिक इलेक्ट्रिक वाहनों के जरिए डोर-टू-डोर कूड़ा कलेक्शन किया जा रहा है, जिससे पर्यावरण संरक्षण को बढ़ावा मिला है।
महापौर जी ने कहा कि लखनऊ को जीरो वेस्ट सिटी बन चुका है और प्रतिदिन लगभग 2000 मैट्रिक टन कचरे का वैज्ञानिक निस्तारण हो रहा है। लेगेसी वेस्ट के निस्तारण के साथ ही भविष्य में वेस्ट-टू-एनर्जी प्लांट स्थापित करने का लक्ष्य भी रखा गया है।

पर्यावरण संरक्षण पर बात करते हुए उन्होंने बताया कि माननीय प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के “एक पेड़ मां के नाम” अभियान के तहत वृक्षारोपण और मियावाकी पद्धति से शहरी वन विकसित किए जा रहे हैं, साथ ही “नमो वन” जैसे हरित क्षेत्रों का विस्तार किया जा रहा है।
उन्होंने यह भी कहा कि लखनऊ जैसे ऐतिहासिक शहर में विकास के साथ-साथ विरासत संरक्षण को प्राथमिकता दी जा रही है। हज़रतगंज जैसे क्षेत्रों की पहचान को सुरक्षित रखते हुए आधुनिक शहरी ढांचे विकसित किए जा रहे हैं।

दूसरे सत्र में गहन चर्चा
कार्यक्रम के दूसरे सत्र में एक महत्वपूर्ण तकनीकी सत्र आयोजित किया गया, जिसमें “अर्थव्यवस्था, सुदृढ़ता (रेजिलिएंस), पर्यटन और विरासत” विषय पर विस्तृत मंथन हुआ। इस सत्र में विभिन्न शहरों के विशेषज्ञों और जनप्रतिनिधियों ने अपने अनुभव साझा किए और भविष्य की शहरी चुनौतियों व संभावनाओं पर विचार-विमर्श किया।
इस दौरान महापौर श्रीमती सुषमा खर्कवाल ने शहरी विकास, सशक्त स्थानीय शासन, सतत पर्यटन और जलवायु अनुकूलन जैसे विषयों पर लखनऊ के अनुभव साझा किए। उन्होंने कहा कि तेजी से बढ़ती शहरी आबादी को ध्यान में रखते हुए शहरों को स्मार्ट, टिकाऊ और समावेशी बनाना समय की आवश्यकता है।

सत्र में एडिशनल डायरेक्टर, डिपार्टमेंट ऑफ डेवलपमेंट, गवर्नमेंट ऑफ गोवा श्री पंकज राणे, डायरेक्टर आरसीयूईएस मुंबई डॉ. अजीत सालवी, गोवा स्टेट बायोडायवर्सिटी बोर्ड के मेंबर सेक्रेटरी डॉ. प्रदीप सरमोकदम, चित्तूर म्युनिसिपल कॉरपोरेशन के कमिश्नर श्री पी. नरसिम्हा प्रसाद, हिमाचल प्रदेश के पालमपुर की कमिश्नर सुश्री नेत्रा मेती तथा ओमीर्थ फाउंडेशन गोवा के निदेशक व को-फाउंडर डॉ. एर्डिन सिल्वेस्टर जी सहित कई विशेषज्ञ उपस्थित रहे।
अंत में महापौर ने कहा कि विकसित भारत का सपना तभी साकार होगा जब हमारे शहर स्वच्छ, हरित, सशक्त और नागरिक-केंद्रित बनेंगे।
