कई और उलेमा का मिला साथ
इमामबाड़े में आने वाले पर्यटक धार्मिक इमारतों की पवित्रता का सम्मान करते नज़र नहीं आते:मौलाना जव्वाद
ईद-ए-गदीर के मौके पर ट्रस्ट के अधीन सभी इमारतों में रोशनी और सजावट की व्यवस्था की जाए: मौलाना सैफ अब्बास

*लखनऊ*।इबादतगाहों की बेअदबी, उनकी पवित्रता के उल्लंघन और इमामबाड़ों में होने वाली अधार्मिक गतिविधियों के खिलाफ आज उलमा-ए-किराम मौलाना कल्बे जवाद नकवी के नेतृत्व में बड़े इमामबाड़े का निरीक्षण करने पहुंचे।
इस मौके पर मौलाना कल्बे जवाद नकवी ने कहा कि जिला मजिस्ट्रेट ने हमारी इबादतगाहों की पवित्रता बनाए रखने के लिए जो वादा किया था, उस पर अब तक कोई कार्रवाई नहीं हुई है। जिला मजिस्ट्रेट ने कहा था कि इमामबाड़े में प्रवेश करने वाले लोगों से धार्मिक इमारतों की मर्यादा और पवित्रता का ध्यान रखा जाएगा, लेकिन यहां हालात इसके विपरीत दिखाई दे रहे हैं।

मौलाना ने कहा कि बड़े इमामबाड़े में आने वाले पर्यटक धार्मिक इमारतों की पवित्रता का सम्मान करते नज़र नहीं आए और वहां कोई स्पष्ट नियम लागू नहीं था। पूरे इमामबाड़े में अव्यवस्था का माहौल था। यहां तक कि धार्मिक इमारतों की देखरेख में भी लापरवाही दिखाई दी।
उन्होंने कहा कि जिला मजिस्ट्रेट से जो मांगें की गई थीं, उन्हें पूरा किया जाना चाहिए, क्योंकि हम अपनी इबादतगाहों की बेअदबी बर्दाश्त नहीं करेंगे। उन्होंने चेतावनी दी कि अगर धार्मिक स्थलों की पवित्रता का ध्यान नहीं रखा गया तो जल्द ही इस संबंध में बड़े और महत्वपूर्ण फैसले लिए जाएंगे।

मौलाना सैफ अब्बास नकवी ने कहा कि इबादतगाहों की पवित्रता बनाए रखना जरूरी है और किसी भी तरह की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। उन्होंने कहा कि पार्किंग का काम तो रुक गया है, लेकिन सड़क के जो पत्थर तोड़े गए थे, उनकी मरम्मत अब तक नहीं हुई है।
उन्होंने कहा कि ईद-ए-गदीर इस्लाम की सबसे बड़ी ईद है, लेकिन इस अवसर पर भी हमारी धार्मिक इमारतों में कोई विशेष सजावट या रौनक नहीं होती। इसलिए ईद-ए-गदीर के मौके पर ट्रस्ट के अधीन सभी इमारतों में रोशनी और सजावट की व्यवस्था की जानी चाहिए।
उलमा ने सबसे पहले इमामबाड़े के अंदर फातिहा पढ़ी और उसके बाद पूरे परिसर का निरीक्षण किया।

इसके बाद उलमा घंटाघर और उसके आसपास के इलाकों का जायजा लेने पहुंचे। वहां दुकानदारों ने मौलाना कल्बे जवाद नकवी को अपनी मांगों का ज्ञापन सौंपा। दुकानदारों का कहना था कि गरीबों की दुकानें हटा दी गईं, लेकिन अमीरों के रेस्टोरेंट अब भी चल रहे हैं।
मौलाना कल्बे जवाद नकवी ने कहा कि गरीब दुकानदारों के खिलाफ की गई कार्रवाई निंदनीय है। अगर यहां गरीबों की दुकानें नहीं चल सकतीं तो अमीरों के रेस्टोरेंट भी बंद होने चाहिए। उन्होंने कहा कि टुंडे कबाबी का रेस्टोरेंट खुला हुआ है, जबकि बड़े इमामबाड़े के नौबतखाने को गरीबों से खाली कराकर ए.एस.आई को सौंप दिया गया। यह गरीबों के साथ अन्याय है।
*मौलाना सैफ अब्बास ने भी गरीब दुकानदारों की दुकानें हटाए जाने की निंदा की और कहा कि जब यहां टुंडे कबाबी का रेस्टोरेंट चल सकता है तो गरीबों की दुकानें क्यों नहीं चल सकतीं?*
इस मौक़े पर मौलाना कल्बे जवाद नकवी के साथ मौलाना सैफ अब्बास नकवी, मौलाना फरीदुल हसन, मौलाना मुस्तफा अली खान, मौलाना मोहम्मद मशीरकैन, मौलाना रजा अब्बास, मौलाना शौकत अब्बास, मौलाना सुहैल अब्बास, मौलाना तफ्सीर हुसैन, मौलाना मोहम्मद शफीक, मौलाना अफजल हैदर तथा अन्य लोग मौजूद रहे।
