दिल्ली के रिहायशी इलाकों में अवैध तौर पर चल रहे

दिल्ली के रिहायशी इलाकों में अवैध तौर पर चल रहे

राजधानी दिल्ली के रिहायशी इलाकों में अवैध तौर पर चल रहे लगभग 25 हजार कारखाने सील होंगे। तीनों नगर निगमों में इन कारखानों का सर्वे पूरा कर लिया है। माना जा रहा है कि सप्ताह भर के भीतर ही निगमों की ओर से इन सभी कारखानों को नोटिस देने और सील करने का अभियान शुरू किया जा सकता है।

हाल ही में दिल्ली सरकार के औद्योगिक व आधारभूत ढांचा विकास निगम (डीएसआईआईडीसी) की ओर से तीनों निगमों को 51 हजार 837 कारखानों की सूची सौंपी गई थी। तीनों नगर निगमों ने इन सभी कारखानों का सर्वे कर इनमें से 25 हजार को अवैध पाया। सबसे ज्यादा 10 हजार 23 कारखाने दक्षिणी नगर निगम क्षेत्र में चल रहे हैं। सूत्रों के मुताबिक, उत्तरी दिल्ली नगर निगम के आयुक्त मधुप व्यास ने हाल ही में सभी जोन के उपायुक्तों के साथ इस संबंध में बैठक की थी,जिसमें रिहायशी क्षेत्र में स्थित कारखानों को नोटिस देने और उन्हें सील करने का अभियान चलाने के निर्देश दिए हैं।

मोहलत मिल सकती है : निगम के कुछ सूत्रों का मानना है कि स्वतंत्रता दिवस के चलते रिहायशी क्षेत्र में चल रही फैक्टरियों को कुछ वक्त की मोहलत मिल सकती है। फैक्टरियों में सीलिंग अभियान चलाने के लिए बड़े पैमाने पर पुलिस बलों की जरूरत पड़ेगी। जबकि, स्वतंत्रता दिवस के पहले पुलिस बल मिलने में दिक्कत आती रही है। इसके चलते तत्काल अभियान शुरू करने में निगम के सामने अड़चन आ सकती है।

प्रदूषण-जाम मुख्य कारण
रिहायशी इलाके में चलने वाले कारखानों को प्रदूषण और जाम की बड़ी वजह बताया जाता रहा है। इन कारखानों के चलते हवा और भूमिगत जल भी प्रदूषित हो जाते हैं। इसी के चलते यह कार्रवाई की जा रही है।

ये इलाके ज्यादा प्रभावित
यूं तो दिल्ली के बहुत सारे इलाकों में अवैध तौर पर कारखाने चलाए जा रहे हैं। लेकिन, विश्वास नगर, गांधी नगर, मंगोलपुरी, शिवविहार, करोल बाग, रोहिणी, कीर्ति नगर इंदरपुरी जैसे क्षेत्रों में इनकी तादाद सबसे ज्यादा है।

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