उपाध्यक्ष के आदेशों की अवहेलना

लखनऊ।(*सैयद जावेद हुसैन*) लखनऊ विकास प्राधिकरण (एलडीए) के प्रवर्तन सेल की कार्यप्रणाली को लेकर एक बार फिर चर्चाओं का बाजार गर्म है। आरोप है कि उपाध्यक्ष द्वारा जारी स्पष्ट प्रशासनिक निर्देशों के बावजूद प्रवर्तन शाखा के कुछ अधिकारी और कर्मचारी आदेशों का पूर्ण पालन नहीं कर रहे हैं, जिससे विभागीय अनुशासन और जवाबदेही पर सवाल खड़े हो रहे हैं।
जानकारी के अनुसार, एलडीए उपाध्यक्ष ने प्रवर्तन सेल के अधिकारियों एवं कर्मचारियों को लालबाग स्थित कार्यालय से कार्य करने के निर्देश दिए थे। बताया जाता है कि अधिकांश कनिष्ठ कर्मचारियों ने आदेश का अनुपालन करते हुए लालबाग कार्यालय में बैठना शुरू कर दिया, लेकिन कुछ अवर अभियंता एवं सहायक अभियंता अब भी गोमतीनगर स्थित प्राधिकरण मुख्यालय में ही कार्य करते दिखाई दे रहे हैं।
सूत्रों के अनुसार, हाल ही में उपाध्यक्ष द्वारा मुख्यालय के निरीक्षण के दौरान दसवीं मंजिल पर कुछ प्रवर्तन कर्मियों और अधिकारियों की उपस्थिति पर नाराजगी व्यक्त की गई। बताया जाता है कि संबंधित कर्मचारियों को तत्काल लालबाग कार्यालय से कार्य करने के निर्देश दिए गए तथा भविष्य में आदेशों का कड़ाई से पालन सुनिश्चित करने को कहा गया।
इस घटनाक्रम के बाद एलडीए के अंदर कई सवाल उठने लगे हैं। चर्चा इस बात की है कि यदि स्पष्ट आदेश जारी किए जा चुके थे, तो कुछ अधिकारी मुख्यालय में बने रहने का साहस कैसे कर रहे थे।
विभागीय गलियारों में यह भी चर्चा है कि कुछ अधिकारियों को उच्च स्तर के संरक्षण का भरोसा होने के कारण आदेशों की अनदेखी की जा रही थी। हालांकि इन चर्चाओं की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।
प्राधिकरण कर्मचारियों के बीच यह भी चर्चा का विषय बना हुआ है कि प्रवर्तन से संबंधित शिकायतों, विशेषकर मुख्यमंत्री पोर्टल एवं आईजीआरएस मामलों के निस्तारण में कुछ कर्मचारियों की भूमिका अत्यधिक प्रभावशाली मानी जाती है, जिसके कारण वे अधिकारियों के निकट बने रहते हैं।
उधर, कर्मचारियों और आम नागरिकों के बीच यह प्रश्न तेजी से उठ रहा है कि क्या प्राधिकरण के सभी अधिकारियों और कर्मचारियों पर एक समान नियम लागू हैं, अथवा कुछ लोगों को विशेष छूट प्राप्त है। यदि आदेशों का पालन नहीं हो रहा है, तो प्रशासनिक अनुशासन सुनिश्चित करने के लिए क्या कार्रवाई की जाएगी, इस पर भी निगाहें टिकी हुई हैं।
फिलहाल एलडीए प्रशासन की ओर से इस पूरे मामले पर कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है।
यदि आरोपों में तथ्य पाए जाते हैं, तो यह मामला प्रशासनिक अनुशासन और जवाबदेही के लिहाज से गंभीर माना जा सकता है।
