अमौसी में 9 और मध्य क्षेत्र में 4 उपभोक्ताओं पर मुकदमा

*लखनऊ*। विद्युत चोरी पर अंकुश लगाने के लिए बिजली विभाग द्वारा चलाए जा रहे अभियान के तहत अमौसी क्षेत्र में 9 तथा मध्य क्षेत्र में 4 उपभोक्ताओं के खिलाफ विद्युत चोरी के मामले दर्ज किए गए हैं। विभागीय अधिकारियों का दावा है कि लाइन लॉस कम करने और राजस्व बढ़ाने के उद्देश्य से लगातार प्रवर्तन एवं विजिलेंस टीमों द्वारा सघन जांच अभियान चलाए जा रहे हैं, जिनके सकारात्मक परिणाम सामने आ रहे हैं।
अमौसी क्षेत्र में अधिशासी अभियंता रेड असेसमेंट एंड कलेक्शन के नेतृत्व में चलाए गए मॉर्निंग रेड अभियान के दौरान 88 विद्युत संयोजनों की जांच की गई। जांच में 9 उपभोक्ता मीटर बाईपास कर बिजली चोरी करते पाए गए, जिनके विरुद्ध विद्युत अधिनियम की धारा 135 के तहत मुकदमा दर्ज कराया गया। वहीं मध्य क्षेत्र में भी 4 उपभोक्ताओं के खिलाफ बिजली चोरी के प्रकरण दर्ज किए गए हैं।

निस्संदेह, बिजली चोरी के विरुद्ध विभाग की यह कार्रवाई सराहनीय है। लगातार चल रहे अभियानों से यह संदेश जा रहा है कि अवैध रूप से बिजली का उपयोग करने वालों के खिलाफ कार्रवाई की जा रही है। इससे ईमानदारी से बिल जमा करने वाले उपभोक्ताओं में भी विश्वास बढ़ता है और राजस्व हानि को रोकने में मदद मिलती है।
हालांकि, विभागीय अभियानों के बीच कुछ सवाल भी खड़े हो रहे हैं। जानकारों का कहना है कि अधिकांश कार्रवाई घरेलू और छोटे उपभोक्ताओं तक सीमित दिखाई देती है, जबकि बड़े पैमाने पर होने वाली बिजली चोरी, संदिग्ध औद्योगिक और व्यावसायिक लोड तथा कुछ क्षेत्रों में वर्षों से जारी अनियमितताओं पर अपेक्षित सख्ती नजर नहीं आती। कई इलाकों में उपभोक्ता यह शिकायत भी करते हैं कि खराब मीटर, ढीले तार, जर्जर नेटवर्क और बार-बार होने वाली तकनीकी खराबियों के कारण होने वाले लाइन लॉस को भी कई बार चोरी के आंकड़ों के साथ जोड़कर देखा जाता है।

इसके अलावा विभाग के सामने एक बड़ी चुनौती यह भी है कि जिन क्षेत्रों में लगातार बिजली चोरी पकड़ी जा रही है, वहां पूर्व में निगरानी व्यवस्था कितनी प्रभावी थी और चोरी लंबे समय तक कैसे जारी रही। यदि नियमित निरीक्षण और स्थानीय स्तर पर जवाबदेही तय हो तो कई मामलों को शुरुआती चरण में ही रोका जा सकता है।
बिजली विशेषज्ञों का मानना है कि केवल मुकदमे दर्ज करने से समस्या का स्थायी समाधान नहीं होगा। विभाग को चोरी रोकने के साथ-साथ वितरण व्यवस्था में सुधार, स्मार्ट मीटरिंग, कमजोर नेटवर्क के आधुनिकीकरण और जवाबदेही तय करने पर भी समान रूप से ध्यान देना होगा। तभी लाइन लॉस में वास्तविक कमी आएगी और उपभोक्ताओं को बेहतर विद्युत सेवाएं मिल सकेंगी।
फिलहाल विभाग ने संकेत दिए हैं कि बिजली चोरी के खिलाफ अभियान आगे भी जारी रहेगा और दोषी पाए जाने वालों के विरुद्ध कठोर कार्रवाई की जाएगी। वहीं उपभोक्ताओं की अपेक्षा है कि चोरी रोकने के साथ-साथ विभाग अपनी आंतरिक कमियों को दूर करने की दिशा में भी ठोस कदम उठाए।
