भीषण गर्मी में बिजली संकट से बेहाल पुराना लखनऊ

लोगों का फूटा गुस्सा

अकबरी गेट से सआदतगंज तक बार-बार कटौती और केबल फाल्ट से हाहाकार

 बिजली चोरी पर भी उठे सवाल

*लखनऊ*। (*शेख साजिद हुसैन*)राजधानी लखनऊ में पड़ रही भीषण गर्मी के बीच बिजली विभाग की लापरवाही एक बार फिर सवालों के घेरे में आ गई है। पुराने लखनऊ के कई इलाकों में लगातार बिजली कटौती, बार-बार आने वाले केबल फाल्ट और अव्यवस्थित बिजली व्यवस्था ने आम लोगों का जीना मुश्किल कर दिया है। हालात इस कदर खराब हो चुके हैं कि लोगों का गुस्सा अब सड़कों पर दिखाई देने लगा है।

एक दिन पूर्व अकबरी गेट और आसपास के इलाकों में घंटों बिजली गुल रहने से नाराज़ लोग सड़क पर उतर आए और बिजली विभाग के खिलाफ जोरदार विरोध प्रदर्शन किया। लोगों का आरोप था कि भीषण गर्मी में लगातार बिजली कटौती से बच्चों, बुजुर्गों और मरीजों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है, लेकिन विभागीय अधिकारी शिकायतों के बावजूद गंभीरता नहीं दिखा रहे।

इससे पहले 23 अप्रैल को पुराने लखनऊ के सआदतगंज इलाके में भी बड़ा बिजली संकट सामने आया था। सहादतगंज और आसपास के घनी आबादी वाले क्षेत्रों—सआदतगंज, टिकेट राय तालाब, सचिवालय कॉलोनी, कटरा, कश्मीरी मोहल्ला, दरगाह क्षेत्र, दाल मंडी, मातादीन रोड, दयादीन रोड और पान दरीबा—में रात करीब 8:15 बजे अचानक बिजली आपूर्ति ठप हो गई थी। करीब चार घंटे से अधिक समय तक बिजली न आने से लोग उमस भरी गर्मी और अंधेरे में बेहाल रहे।

स्थानीय सूत्रों के मुताबिक क्षेत्र की सपोर्टिंग केबल में पहले से फाल्ट मौजूद था, लेकिन विभाग ने समय रहते उसे ठीक कराने की जरूरत नहीं समझी। इसी दौरान दूसरी केबल में भी खराबी आ गई, जिसके बाद पूरे इलाके की बिजली व्यवस्था चरमरा गई। लोगों का कहना है कि यदि पहले खराब केबल को दुरुस्त कर लिया गया होता तो इतनी बड़ी आबादी को इस परेशानी का सामना नहीं करना पड़ता।

अब इस पूरे मामले में बिजली चोरी को लेकर भी गंभीर सवाल उठने लगे हैं। सूत्रों का दावा है कि पुराने लखनऊ के कई इलाकों में धड़ल्ले से बिजली चोरी हो रही है। आरोप यह भी हैं कि बिजली चोरी करने वाले कुछ लोग खुद को विभाग से जुड़ा हुआ बताते हैं और कुछ विभागीय अधिकारियों से करीबी होने का दावा करते हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि अवैध कनेक्शन और ओवरलोडिंग की वजह से ट्रांसफार्मरों और केबलों पर अतिरिक्त दबाव पड़ता है, जिससे बार-बार फाल्ट और ट्रिपिंग की समस्या बढ़ती जा रही है।

नागरिकों का आरोप है कि विभाग छोटे उपभोक्ताओं पर कार्रवाई दिखाकर औपचारिकता पूरी कर देता है, जबकि बड़े स्तर पर हो रही कथित बिजली चोरी पर प्रभावी कार्रवाई नहीं की जाती। लोगों का कहना है कि यदि बिजली चोरी पर सख्ती से रोक लगाई जाए और पूरे नेटवर्क का तकनीकी ऑडिट कराया जाए तो काफी हद तक समस्या कम हो सकती है।

बिजली गुल होने से जहां घरों में अंधेरा छा गया, वहीं स्ट्रीट लाइट बंद होने से सड़कों पर आवागमन भी प्रभावित हुआ। कई इलाकों में लोग घरों से बाहर निकलकर गलियों और सड़कों पर बैठने को मजबूर दिखाई दिए। स्थानीय नागरिकों का आरोप है कि जिम्मेदार अधिकारी समय पर मौके पर नहीं पहुंचते और शिकायतों के समाधान में भारी लापरवाही बरती जाती है।

लोगों का कहना है कि एक तरफ प्रदेश के ऊर्जा मंत्री लगातार निर्बाध बिजली आपूर्ति के निर्देश देते हैं, वहीं दूसरी ओर क्षेत्रीय अधिकारियों की कार्यशैली उन निर्देशों को पलीता लगाती नजर आती है। आरोप यह भी है कि अधिकारी एसी दफ्तरों में बैठकर कागजी व्यवस्थाएं दिखाते हैं, जबकि जमीनी स्तर पर हालात बद से बदतर बने हुए हैं।

हालांकि बिजली विभाग के कर्मचारियों ने भूमिगत केबल में आए फाल्ट को ढूंढने और उसे ठीक करने का प्रयास किया था, लेकिन देर रात तक भी कई इलाकों में बिजली आपूर्ति सामान्य नहीं हो सकी थी। लोगों में इस बात को लेकर भारी नाराजगी रही कि समस्या का स्थायी समाधान करने के बजाय अस्थायी इंतजामों से काम चलाया जा रहा है।

स्थानीय निवासियों ने यह भी शिकायत की है कि आज भी कई इलाकों में हर 15 से 20 मिनट के अंतराल पर बिजली ट्रिप कर रही है। खबर लिखे जाने तक देर रात करीब डेढ़ बजे तक यही सिलसिला जारी रहा, जिससे लोगों की परेशानी और बढ़ गई।

इसी बीच एक और गंभीर सवाल विभागीय कार्यप्रणाली पर खड़ा हो रहा है। केबल फाल्ट ढूंढने के लिए नूर बाड़ी स्थित कच्ची कर्बला के पास बनी मस्जिद के सामने सड़क को खोदा गया था, लेकिन कई दिन गुजर जाने के बाद भी सड़क की मरम्मत नहीं कराई गई। टूटी सड़क स्थानीय लोगों के लिए हादसों का कारण बन सकती है। नागरिकों का सवाल है कि आखिर सड़क खोदने के बाद उसे दोबारा बनवाने की जिम्मेदारी किस विभाग की है और अब तक कार्रवाई क्यों नहीं हुई?

स्थानीय लोगों ने मांग की है कि लगातार हो रही बिजली कटौती, खराब रखरखाव, कथित बिजली चोरी और विभागीय लापरवाही के लिए जिम्मेदार अधिकारियों की जवाबदेही तय की जाए। साथ ही पुराने लखनऊ की जर्जर बिजली व्यवस्था को तत्काल दुरुस्त कर स्थायी समाधान निकाला जाए, ताकि भीषण गर्मी में लोगों को राहत मिल सके।

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