दरगाह हज़रत अब्बास में फिसलन भरे फर्श पर फिर हादसा

पत्रकार से अभद्रता के बाद सुरक्षा और पारदर्शिता पर उठे सवाल

 

*लखनऊ। (शेख साजिद हुसैन)* पुराने लखनऊ स्थित ऐतिहासिक धार्मिक स्थल दरगाह हज़रत अब्बास एक बार फिर अव्यवस्थाओं और सुरक्षा चूक को लेकर चर्चा में है। दरगाह परिसर में फिसलन भरे फर्श के कारण लगातार हो रहे हादसों ने ज़ायरीनों की सुरक्षा पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। स्थानीय लोगों का आरोप है कि करोड़ों रुपये खर्च होने के बावजूद यह नई समस्या बनी हुई है और प्रशासन अब तक कोई ठोस समाधान नहीं निकाल सका है।

 

स्थानीय नागरिकों के मुताबिक, दरगाह परिसर में शायद ही कोई दिन ऐसा गुजरता हो जब कोई श्रद्धालु फिसलकर घायल न हो रहा हो। मंगलवार रात करीब 10 बजे एक व्यक्ति अपनी दोपहिया वाहन सहित चिकने फर्श पर फिसलकर गिर पड़ा। प्रत्यक्षदर्शियों का कहना है कि हादसा इतना अचानक हुआ कि मौके पर अफरा-तफरी मच गई।

घटना के दौरान मौके पर मौजूद एक पत्रकार जब वीडियो बना रहा था, तभी एक युवक ने उसे रोकते हुए सवाल किया “मूवी क्यों बना रहे हैं?”

पत्रकार द्वारा जनहित और पेशेगत जिम्मेदारी का हवाला देने पर युवक ने कथित तौर पर अभद्र भाषा का इस्तेमाल करते हुए कहा कि “आप लोग सिर्फ कमियां निकालते हैं।”

मौके पर मौजूद लोगों ने हस्तक्षेप कर स्थिति को शांत कराया, लेकिन बाद में सामने आया कि विरोध करने वाला युवक कथित रूप से दरगाह प्रशासन से जुड़े परिवार का रिश्तेदार बताया जा रहा है, जिसे मुतवल्ली के बहनोई का भांजा कहा जा रहा है।

इस घटना के बाद पत्रकारों में रोष व्याप्त है। उनका कहना है कि यदि जनहित से जुड़े मुद्दों की कवरेज करने से रोका जाएगा, तो आम जनता की समस्याएं सामने कैसे आएंगी। यह भी आरोप लगाया जा रहा है कि पहले भी यहां पत्रकारों की निगरानी और दबाव जैसी घटनाएं सामने आती रही हैं, जिससे निष्पक्ष पत्रकारिता पर खतरे की आशंका बढ़ती जा रही है।

 

स्थानीय लोगों और सामाजिक लोगों ने पूरे मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की है। उनका कहना है कि

फर्श निर्माण में यदि किसी प्रकार की लापरवाही या भ्रष्टाचार हुआ है तो जिम्मेदारों पर कार्रवाई हो

दरगाह परिसर में सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए जाएं

ज़ायरीनों की सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जाए

पत्रकारों को स्वतंत्र रूप से काम करने की गारंटी दी जाए

 

क्या धार्मिक स्थलों पर खामियों को उजागर करना अब अपराध बनता जा रहा है?

और क्या जिम्मेदार लोग जवाबदेही से बचने के लिए दबाव की रणनीति अपना रहे हैं?

फिलहाल, इस पूरे घटनाक्रम ने न सिर्फ दरगाह प्रशासन की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े किए हैं, बल्कि यह भी स्पष्ट कर दिया है कि जनहित और सुरक्षा से जुड़े मुद्दों को नजरअंदाज करना अब भारी पड़ सकता है।

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